डा.आरएस फर्त्याल व डा. पीसी सती की उपलब्धि, नई प्रजाति की फल मक्खी फोर्टिका वाटाबी की खोज, एचएन बहुगुणा गढ़वाल विवि के कीट वैज्ञानिक हैं डा. फर्त्याल

नैनीताल । लाइव उत्तराँचल न्यूज़
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के जन्तु विज्ञान विभाग के फ्लाई लैब के वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डा.राजेंद्र सिंह फर्त्याल व उनके शोध छात्र रहे डा.प्रदीप चंद्र सती (प्रवक्ता जंतु विज्ञान विभाग राजकीय डिग्री कालेज तलवाड़ी) ने मिलकर सिमली नारायणबगड़ (चमोली) से एक नई प्रजाति की फल मक्खी की खोज की है।। इसका नाम उन्होंने अपने जापानी वैज्ञानिक प्रो.वाटाबे के नाम पर फोर्टिका वाटाबी रखा है। उल्लेखनीय है कि वंश फोर्टिका की देश में मात्र सात प्रजातियों की जानकारी है। लेकिन उसके उपवंश आसिमा को भारत में पहली बार खोजा

वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डा.राजेंद्र सिंह फर्त्याल

गया है। अब इस प्रजाति की ज्ञात फल मक्खियां की संख्या 8 हो गई है। डा. फर्त्याल का यह शोध शोध पत्र अंतरर्राष्ट्रीय जनरल जुटैक्सा में प्रकाशित हुआ है। यह शोध पत्र संयुक्त रुप से प्रकाशित हुआ है जिसमें दो जापानी प्रोफेसर टोडा व डा.काटोह, एक थाईलैंड डा.बानाजीगर जबकि एक इंडोनेशिया के डा.सुवीतो हैं। इस शोध पत्र में सात प्रजातियों के विवरण के साथ ही सब जीनस आसिमा में असम्मति पुरुष जननांग का वर्गीकरण और क्रमांगत उन्नति का वर्णीकरण किया गया है। डा.फर्त्याल ने बताया कि उपवंश आसिमा की क्रमागत उन्नति के अध्ययन के लिए 66 रुपात्मक वर्णों का विश्लेषण किया गया है। डा.फर्त्याल की मानें तो इस अध्ययन से यह पता चला है कि प्रजातियां कई उपकोषों व गुच्छों में विभाजित होती हैं जिसमें से प्रत्येक विशिष्टता के साथ अत्यधिक सर्मर्पित रहती है।

डा.प्रदीप चंद्र सती (प्रवक्ता जंतु विज्ञान विभाग राजकीय डिग्री कालेज तलवाड़ी)

कहा कि इस जटिलता को समझने के लिए उपवंश आसिमा की कुछ प्रजातियों में असमित पुरुष जननांगों का मिलान किया गया जिससे पता चला कि कुछ प्रजातियों की आतंरिक दर्पण छवि भिन्न थी जबकि दूसरों में दिशात्मक विभिन्नता पायी गई। इस उपजाति में जननांग विषमता का विकास दो पक्षीय संरचनाओं में समरुपता, दिशात्मक विषमता के आधार पर पैतृक विकास का अनुमान लगाया गया। यहां बता दें कि डा.राजेंद्र सिंह फर्त्याल ने वर्ष 2014 में भी फल मक्खियों की कई नई प्रजातियां खोजी हैं जिसका वर्गीकरण अध्ययन अभी प्रकाशित होना है। इस बीच शोध पत्र के अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होने पर विवि के कुलपति प्रो.अन्नपूर्णा नौटियाल, कुल सचिव प्रो. एन.एस.पवार समेत डा.दीपक भंडारी, प्रो.विनोद नौटियाल, डा.सौरभ यादव,प्रो.कौशल तथा प्रो.चटर्जी ने दोनों वैज्ञानिकों को अपनी बधाई दी है।

भारत में अभी तक 322 फल मक्खियां हैं मौजूद

नैनीताल। अभी तक भारत देश में फल मक्खियों की कुल संख्या 322 है जो कि 26
वंशों का प्रतिनिधित्व करती हैं। नई प्रजाति की फल मक्खी फोर्टिका वाटाबी 323 फल मक्खी है। फल मक्खी की यात्रा पहचान करीब 1911 साल पहले प्रो.टी.एस.मोगली और उनके शोध छात्रों ने लाल आंखों वाली मक्खी से किया था जो कि अभी तक अनुवांशिकीय क्षेत्र में निरंतर शोध कार्य चल रहा है। डा.राजेंद्र सिंह फर्त्याल से मो. 9412356050 से संपर्क किया जा सकता है।

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