अयोध्या जैसी मैंने देखी, सरयू के पावन तट पर बसी धर्म नगरी की अविस्मरणीय यात्रा- जगदीश जोशी, वरिष्ठ पत्रकार, नैनीताल

जगदीश जोशी, वरिष्ठ पत्रकार, नैनीताल

As I saw Ayodhya, an unforgettable visit to a religious city situated on the holy coast of Saryu - Jagdish Joshi, senior journalist, Nainital
अयोध्या में सरयू के किनारे भगवान राम अपने प्रिय भक्त हनुमान के साथ विराजमान  

इतिहास अयोध्या में 492 साल बाद एक बार फिर से करवट ले रहा है। 5 अगस्त यानि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी यहां भगवान श्री राम के मंदिर का शिलान्यास करने पहुंच रहे हैं। ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार बाबर  के 1526 में भारत पर विजय के दो साल बाद 1528 में राम जन्म स्थान पर बना मंदिर ध्वस्त कर दिया गया। इस स्थल पर मस्जिद बनवा दी गई। 1992 में इस ढांचे को ध्वस्त कर देने के बाद से घटनाक्रम तेजी से करवट लेने लगा  और अब मंदिर बनाने की औपराचिक कवायद शुरू होने जा रही है।
यह महज इत्तेफाक ही था कि मई 2019 में मुझे भी अयोध्या जाने का मौका मिला। राम लला को टेंट में देखने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। आयोध्या की चर्चा के बीच उस दौरान खींची गई तस्वीरों को आपके साथ साझा करने की धृष्टता कर रहा हूं।
अयोध्या रेलवे स्टेशन में पहुंचने पर वहां लगे शिलापट से इसकी महत्ता का अहसास होने लगा। इसमें भगवान राम के अवधपुरी की महिमा का स्वयं बखान किया है।


भगवान राम से जुड़े स्थलों से पहले आपको अयोध्या में माता के मंदिर के दर्शन कराता चलता हूं।  डोगरा रेजीमेंट के एरिया में बने भव्य मंदिर के निकट ही मां मरी या मणी देवी मंदिर है। अयोध्या में इसका विशेष आकर्षण हैः


सरयू नदी के पावन तट पर स्नान आदि का विशेष महत्व है। इससे लगे राम सहित अन्य के घाट हैं। यहां हनुमान के साथ भगवान की विशाल मूर्ति तब भी बनाई गई है। हनुमान को भी भगवान ने यहां राजा का दर्जा दिया था। मान्यता है कि हनुमान ही यहां के अधिष्ठाता हैं। उनका मंदिर हनुमान गढ़ी टीले में स्थापित हैः


भगवान राम के जीवन में आम तौर पर कैकई की नकारात्मक भूमिका देखने को मिलती है लेकिन यहां बना कनन भवन कैकई के राम के प्रति स्नेह का उदाहरण है। बताया जाता है कि राम सीता के विवाह के बाद माता कैकई ने कनक यानि सोने के बने इस भवन को मुंह दिखाई में दिया था। वर्तमान में औरछा (मप्र) के राजा ने इसका  पुर्निर्माण करवाया है। यहां भी राम सीता की भव्य मूर्तियांं स्थापित हैं।

अयोध्या में राम लला के दर्शन के लिए कैमरा ले जाने की इजाजत नहीं थी। लेकिन मंदिर निर्माण के लिए की गई तैयारियों को देखने का मौका मिला। राम जन्म भूमि की कार्यशाला में  जाने पर देखा कि यहां मंदिर निर्माण के लिए मुक्कमल तैयारियां की गई थीं। देश के विभिन्न हिस्सों से राम नाम लिखी ईंटे भी यहां करीने से रखी गई थीं। वहीं इससे जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी देते हुए बोर्ड भी लगाए गए थे।

अंत में में सरयू के किनारे गोप्तार घाट, कहा जाता है कि यहीं से भगवान राम परिजनों सहित देवलोक गए थे।

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