केक और मोमबत्ती से जन्मदिन :सावधान:


भारतीय संस्कृति में जन्मदिन वैदिक तरीके से मनाते थे, मोमबत्ती फूंकना और केक काटना था ही नही। पश्चिमी सभ्यता से ये परम्परा आई है और विदेशी कम्पनियों ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए केक का प्रचार किया जिसके कारण हर कोई जन्मदिन पर केक काटता है और मोमबत्ती पर फूंक मारकर ताली बजाते हैं पर इस पर वैज्ञानिकों ने चौकाने वाले खुलासे किये है ..!अभी कोरोना महामारी में यह आयातित परंपरा बंद नही की तो ये मौत का कारण भी बन सकती है..

प्रो. केएस राणा

कुछ समय पूर्व वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि, केक पर लगी मोमबत्तियों को फूंक मारकर बुझाने से केक बैक्टीरिया से भर जाता है। अमेरिका की क्लेमसन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा है कि “जन्मदिन पर केक पर लगी मोमबत्तियाँ बुझाते समय केक पर थूक फैल जाता है जिसके कारण केक पर 1400% बैक्टीरिया बढ जाते हैं। Corona में तो यही सबसे बड़ी सावधानी बतायी जा रही है ..”

*अन्य शोध के अनुसार भी इंसान की सांस में मौजूद बायोएरोसोल बैक्टीरिया का स्त्रोत है जो फूंक मारने पर केक की सतह पर फैल जाता है। इंसानों का मुहं बैक्टीरिया से भरा होता है।
*जन्मदिवस के अवसर पर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए घी, दूध, शहद और दूर्वा घास के मिश्रण की आहुतियाँ डालते हुए हवन करना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में कितने भी दुःख, कठिनाइयाँ, मुसीबतें हों या आप ग्रहबाधा से पीड़ित हों, उन सभी का प्रभाव शांत हो जायेगा और आपके जीवन में नया उत्साह संचरित होगा
*जन्मदिवस के अवसर पर केक’ पर लगी मोमबत्तियाँ जलाकर फिर फूँक मारकर बुझा देता है । …सोचिये, कैसी उलटी गंगा बहा रहे हैं आप ??जहाँ दीये जलाने चाहिए वहाँ बुझा रहे हैं ?जहाँ शुद्ध चीज खानी चाहिए वहाँ फूँक मारकर उडे हुए थूक से जूठे, जीवाणुओं से दूषित हुए ‘केक’ को बडे चाव से खा-खिला रहे हैं ??
-Corona का प्रसार भी मुँह की बुंदों droplettसे ही फैलता है …..
-अपना शरीर, जिसका जन्मदिवस मनाना है, पंचतत्व से बना है जिनके अलग-अलग रंग हैं । पृथ्वी का पीला, जल का सफेद, अग्नि का लाल, वायु का हरा व आकाश का नीला।घर के सदस्यों से सब दीये जलवायें तथा बडा दीया कुटुम्ब के श्रेष्ठ, ऊँची समझवाले, भक्तिभाववाले व्यक्ति से जलवायें । इसके बाद जिसका जन्मदिवस है, उसे सभी उपस्थित लोग शुभकामनाएँ दें.

पार्टियों में फालतू का खर्च करने के बजाय बच्चों के हाथों से गरीबों में, अनाथालयों में भोजन, वस्त्र इत्यादि का वितरण करवाकर अपने धन को सत्कर्म में लगाने के सुसंस्कार डालें । लोगों से चीज-वस्तुएँ (गिफ्ट्स) लेने के बजाय अपने बच्चे को गरीबों को दान करना सिखायें ताकि उसमें लेने की नहीं अपितु देने की सुवृत्ति विकसित हो ।

🚩बच्चे संकल्प करें कि आनेवाले वर्षों में पढाई, साधना, सत्कर्म आदि से परिवार का नाम रोशन करेंगे .!

प्रो. केएस राणा –सम्प्रति, प्रति कुलाधिपति मेवाड़ यूनिवर्सिटी ,राजस्थान, पूर्व कुलपति कुमाऊं विवि व अन्य विवि (साभार)

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