चीनी सामान का बॉयकॉट किया जा सकता है क्या: प्रो.राणा

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आज भारत चीन सीमा पर तनाव के समय कुछ लोग अपनी पुरानी टीवी सड़कों पर पटक कर या सामान जलाकर विरोध प्रकट कर रहे हैं ….
चीनी सामान का बॉयकट करने के लिए जो पहली शर्त है वो है हमें पता होना चाहिए की कौन कौन से सामान में चीन के पैसे लगे हैं। तो इसे जानने के लिए आपको अच्छा खासा इकोनोमिक एक्सपर्ट बनने की जरूरत पड़ेगी। किस भारतीय प्रोडक्ट में चीन की एसेसरीज लगी है और किस चीनी प्रोडक्ट की फैक्ट्री भारत में लगी है जहां भारतीयों का पैसा लगा है और उन्हें काम मिल रहा है ये पूरी तरह से पता लगाना एक जटिल काम है। आम आदमी के लिए ये बेहद मुश्किल है … किंतु मैं बताता हूँ …कुछ बातें ….

. पेटीएम, पेटीएम मौल, बिग बासस्केट, ड्रीम 11, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट, ओला, मेक माई ट्रिप, स्विगी, जोमेटो जैसे स्टार्ट अप कंपनियों में चीन की अलीबाबा और टेंसट होल्डिंग कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी है।

. भारत में पिछले पांच साल में स्टार्टअप कंपनियों में चीन ने 4 बिलियन डॉलर यानी 30,000 करोड से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट किया है। जो कुल इन्वेस्टमेंट का 2/3 भाग है।

. ओप्पो, विवो, शियोमी जैसे मोबाइल जिनका भारत के 66% स्मार्ट फोन बाजार पर कब्ज़ा वो चीनी कंपनियां है।

. देश भर की सभी पॉवर कंपनियां अपने ज्यादातर इक्विपमेंट चीन के बनाए खरीदते हैं। TBEA जो भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट एक्सपोर्टर है वो चीन समर्थित कंपनी है जिसकी फैक्टरी गुजरात में लगी है।

. देश में बनने वाली दवा का 66% इंग्रेडिएंट्स चीन से आती है।

. भारत में उत्पादित समान का चीन तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर देश है। 2014 के बाद भारत का चीन से इंपोर्ट 55% और एक्सपोर्ट 22% बढ़ी है। भारत चीन के बीच लगभग 7.2 लाख करोड़ का व्यापार होता है जिसमें 1.5 लाख करोड़ भारत एक्सपोर्ट और और 5.8 लाख करोड़ का इंपोर्ट करता है।

. इंडियन इलेक्ट्रिक ऑटो सेक्टर तो पूरी तौर पर चाइनीज कंपनी के चंगुल में आती जा रही। गिले, चेरि, ग्रेट वॉल मोटर्स, चंगान और बीकी फोटॉन जैसी चीनी कंपनियां अगले 3 साल में 5 बिलियन डॉलर यानी 35 हजार करोड से अधिक इन्वेस्टमेंट करने जा रही। इनमे कई की फैक्ट्रियों मुंबई और गुजरात में लग रही है।

. अडानी समूह ने 2017 में चीन की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक ईस्ट होप ग्रुप के साथ गुजरात में सौर ऊर्जा उपकरण के उत्पादन के लिए $300 मिलियन से अधिक का निवेश करने का समझौता किया था। रेनुवल एनर्जी में चीन की लेनी, लोंगी, सीईटीसी जैसी कंपनियां भारत में 3.2 बिलियन डॉलर यानी 25 हजार करोड़ से अधिक इन्वेस्ट करने वाली है।

*- आनंद कृष्णन की एक लेख के अनुसार 2014 में भारत चीन का इन्वेस्टमेंट 1.6 बिलियन था जो मोदी के दोस्ताना रिस्ते बनने के बाद केवल 3 बर्ष 2018 में यह पांच गुना बढ़कर करीब 8 बिलियन डॉलर हो गया ..?

. 2019 अक्टूबर में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) में चीन औद्योगिक पार्क स्थापित करने के लिए चाइना एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (CASME) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिसमें उच्च तकनीक क्षेत्रों में चीन 10,500 करोड़ रुपये के निवेश करेगा। ये प्रक्रिया उस वक़्त शुरू हुईं जब प्रधानमंत्री गुजरात में शी जिनपिंग को झूला झूलाने के लिए लाए थे।

. हाल ही में दिल्ली-मेरठ ​रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) प्रोजेक्ट के अंडरग्राउंड स्ट्रेच बनाने के लिए 1100 करोड का ठेका चीनी कम्पनी SETC को मिला है वहीं महाराष्ट्र सरकार के साथ चीनी वाहन निर्माता कंपनी ग्रेट वॉल मोटर्स (जीडब्ल्यूएम) को 7600 करोड़ रुपये निवेश का समझौता हुआ है।

*तो ये बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सरकारी कंपनी जो पहले से ही खस्ता हालात में है वहां चीनी समान के उपयोग पर प्रतिबंध केवल फैंटा मंडली और मीडिया को चटकारे लगाने के लिए किया गया है। यदि सरकार सच में बॉयकॉट चीनी उत्पाद करने लगे तो सबसे ज्यादा नुकसान गुजराती परम मित्रों को ही होने वाला है ..?

*यदि सच में भारत बॉयकॉट चीन चाहता है तो उसके लिए लंबी, कुशल और दूरदृष्टी रणनीति की जरूरत पड़ेगी। लेकिन जो सरकार चीनी कंपनियों के लगातार बेताहाशा इन्वेस्टमेंट के बाद भी देश की चलती फिरती अर्थव्यवस्था को 8 से 3.5% जीडीपी पर ले आए उससे आप बॉयकॉट चीन पर कितनी आशा रखते हैं … गंभीरता से सोचें .तब बतायें.. देश भक्ति के जज़वे को सलाम करूँगा मैं …


मित्रों चीन की वस्तुओ का बहिष्कार करने भर से कोई हल नहीं निकलने वाला इसका आयात बंद हो तब रास्ता निकलेगा केंद्र स्तर से । जनता थैला लेकर चीन नहीं जाती सामान ख़रीदने …?

लेखक:- प्रो.कृष्ण शेखर राणा, पूर्व कुलपति कुमाऊँ विश्विद्यालय नैनीताल हैं और वर्तमान में प्रति कुलाधिपति – मेवाड़ विवि राजस्थान हैं

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