लोक कलाकार हीरा सिंह राणा के निधन पर सीएम सहित हर वर्ग ने जताया शोक ( नवीन तिवारी, नैनीताल। )

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नैनीताल। नवीन तिवारी
महान लोक कलाकार हीरा सिंह राणा के निधन पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत , केंद्रीय मंत्री डा. निशंक, पूर्व सीएम हरीश रावत समेत बढ़ी तादात में लोगों ने शोक संवेददना व्यक्त की है। हम महान कलाकार को श्रद्धांजलि के तौर पर कुछ चुने हुई शोक संवेदनाओं को पूरे तौर पर देने का प्रयास कर रहे हैं:-

उत्तराखंड के महान लोक गायक, कवि व लोकसंगीत के पुरोधा श्री हीरा सिंह राणा जी के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत दु:ख हुआ। ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने व परिवार को इस दु:ख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।आपके जाने से लोकसंगीत को अपूर्णीय क्षति हुई है – त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

– हिरदा कौन कहेगा, अब मुझसे “लस्के कमर बांधा-हिम्मत का सांथा” हर बार, हर कठिनाई के दौर में, मैं आपके इस गीत को गुन-गुनाता था, आगे भी गुन-गुनाऊंगा लेकिन आप नहीं होंगे। (रावत ने उनके साथ आत्मीय व पारिवारिक सम्बंधों को लेकर अपने फेसबुक वॉल में। लंबी भावुक पोस्ट की है)हरीश रावत पूर्व मुख्यमंत्री :


आज एक युग का अंत हो गया, उत्तराखंड के महान लोक गायक एवं कवि, लोक संगीत के पुरोधा श्री हीरा सिंह राणा जी अब हमारे बीच नहीं रहे। यह हम सब के लिए अत्यंत दुखदायी क्षण है। राणा जी ने अपने लोकगीतों के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा को जन-जन तक पहुंचाया उनके निधन से न केवल उत्तराखंड लोकसंगीत को अपूरणीय क्षति हुई है बल्कि मुझे भी व्यक्तिगत रूप से भारी क्षति हुई है। राणा जी के साथ मेरा पुराना रिश्ता रहा है,कविताओं से मेरा गहरा लगाव होने के कारण मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता था तथा कई बार उनसे मुलाक़ात का सौभाग्य भी मुझे मिला। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करता हूँ व दुःखी परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूँ | – डा. रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय मानव संशाधन मंत्री

लोक गायक हीरा सिंह बिष्ट के निधन से मन दुःखी है। उन्होंने अपनी वाणी से हमेशा उत्तराखंड की संस्कृति एवं संरक्षण को नई दिशा दी थी तथा वे नव युवाओं को उत्तराखंड की संस्कृति एवं सभ्यता से हमेशा रूबरू कराते रहते थे अनायास लोक गायक के चले जाने से राज्य​ को एक बड़ी हानि हुई है जो कभी पूरी नहीं की जा सकती- अजय भट्ट सांसद नैनीताल उधमसिंह नगर

लोकसंगीत क्षेत्र में पूर्ण समर्पित रहे प्रख्यात लोकगायक, पहाड़ के प्रति अनन्य प्रेमभाव रखने वाले हीरा सिंह राणा जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता हूँ- अरविंद पांडे शिक्षा मंत्री ,उत्तराखंड


प्रसिद्ध लोक गायक हीरा सिंह राणा जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता हूँ! वे भाषा एवं लेखन के धनी विनम्र स्वभाव के व्यक्ति थे! पहाड़ के लोकगीत को एक नई पहचान एवं बुलंदियों पर पहुँचाने में उनका अहम योगदान सदैव याद रखा जाएगा! प्रभु जी से पुण्य आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूँ – सुरेंद्र सिंह जीना विधायक सल्ट

राणा जी आपकी सबसे बड़ी खासियत ये रही कि आप सुपरस्टार होकर भी सदा जमीन पर रहे। आप भले ही इस जग में नहीं हैं, लेकिन आपकी यादें, आपके गीत, कविताएँ हमें आपका एहसास कराती रहेंगी। बहुत याद आओगे ‘हीरदा’- रमेश भट्ट मीडिया सलाहकार मुख्यमंत्री उत्तराखंड

– हीरा सिंह राणा जी के आकस्मिक निधन का समाचार हम सबके लिए उत्तराखण्डी समाज के लिये अपूर्णीय क्षति है, लोक संस्कृति के ध्वजवाहक समाज को जागृत करने वाले अपनी थाती पर आधारित रचनाओं को बुलन्द व मधुर स्वरों में प्रस्तुत कर लोगों को आल्हादित करते रहे, उत्तराखंडी संस्कृति व समाज को ब्यापक पहचान दिलाने में भी उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है हमारे बहुत से कार्यक्रमों में भी उन्होंने योगदान किया उत्तराखण्ड राज्य के संघर्ष को अग्रगति प्रदान करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है जसवंत सिंह बिष्ट जी विपिनदा के साथ उनका निकट संबंध रहा, नैनीताल में वे अक्सर हमारे वरिष्ठ साथी अंबादत्त बवाडी.जी के घर पर रूकते थे , उनके निधन से एक युग का अंत हो गया उनके दिवंगत होने पर हम लोगो हार्दिक शोक एवं संवेदना व्यक्त करते हैं और परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि पावन आत्मा को चिर शान्ति प्रदान करैं परिवारजनों व मित्रों को इस दारूण दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करैं! कोटिशः नमन, ऊँ शान्ति शान्ति शान्तिः – डा.नारायण सिंह जन्तवाल पूर्व अध्यक्ष उक्रांद व पूर्व विधायक


-कोरोना काल में प्रिय साथी पुरुषोत्तम असनोड़ा को खोने के बाद उत्तराखंडी लोक जीवन के सरल,सहज,फक्कड़ रचनाकार, लोक गायक हीरा सिंह राणा का आकस्मिक निधन व्यथित कर देने वाला है। सामाजिक – राजनीतिक जीवन और पहाड़ के जनआंदोलनों में शामिल रहते हुए हमने उनको जाना पहचाना था। वे एक महान लोक कलाकार थे, उनके व्यक्तित्व, गीतों व आवाज का जादू पहाडों से निकलने वाली ठंडी हवाओं की तरह सकून देते थे। उनके दुश्मनों की पहचान व उनसे लड़ने की प्रेरणा देते थे। 15-16 जून 2013 को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के रुद्रपुर में हुए दूसरे महाधिवेशन में वे हमारे मुख्य अतिथि थे। उनसे अंतिम मुलाकात दिसम्बर 2019 को सेंट्रेल पार्क दिल्ली में आयोजित कुमाऊनी गढ़वाली जौनसारी अकैडमी के कार्यक्रम में जिसके वे उपाध्यक्ष थे ,चारु भाई के साथ हुई थी, औऱ अब उनकी मृत्यु की मनहूस खबर आई है, हीरा सिंह राणा जी अब नही है, यह विश्वास करने में समय लगेगा। लेकिन उनकी रचनाएँ, गीत , आवाज हमें पहाड़ के दुश्मनों, उनकी जन विरोधी नीतियों की पहचान कराते रहेंगें।राज्य को बेहतर राज्य बनाने की प्रेरणा देते रहेंगे। राणा जी को विनम्र श्रद्धांजलि – पीसी तिवारी केंद्रीय अध्य्क्ष ,उपपा


कुमाउनी के सुपरिचित जनचेतना के लोकगायक व दिल्ली लोकभाषा अकादमी के उपाध्यक्ष हीरा सिंह राणा जी का निधन ! राणा जी का यूँ चले जाना बहुत पीड़ादायक है । आज सुबह तड़के लगभग 3 बजे हार्टअटैक से हुआ निधन ! वे दिल्ली के विनोदनगर स्थित आवास पर थे । उन्होंने अपने शब्दों व स्वर से लोक की चेतना को एक नई अभिव्यक्ति दी । वे वास्तव में लोक के कवि व गायक थे । राणा जी को भावपूर्ण नमन ।। पत्रकार जगमोहन रौतेला हल्द्वानी

-एक लोक कलाकार जो आजन्म संघर्षरत रहा और लोकप्रियता के चरम पर पहुँच अपनी सुवासित महक सम्पूर्ण उत्तराखंडी समाज पर छोड़ गया जिसके मधुर कंठ से निकले गीतों को हम सब गुनगुनाते रहे हैं ऐसे लोक चितेरे को जो सदैव स्मरणीय रहेगा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि – कैलाश तिवारी अधिवक्ता हाईकोर्ट

आह, हीरा सिंह राणा भी चले गए. वे एक उच्च कोटि के लोक गायक ही नहीं बल्कि ठेठ कुमाउ’नी के बहुत ही सृजनशील कवि और हमारी संस्कृति के शलाका पुरूश भी थे. श्रदोत्सव मे जब पहली बार लोक गायक और कवि के रूप मे उन्हे नैनीताल बुलाया गया तो तो बहुत ही भावुक होकर गले मिले और बोले नैनीताल मे किसी को तो उनकी याद आइ.
उत्तराखन्ड साहित्य कला परिषद और राज्य गीत चयन समिति मे भी हम साथ रहे .मिल्ते ही पहाडी मे बात करते थे. हमारी बेशऊर सर्कार ने तो उनके महत्व को नही समझा पर दिल्ली सकार ने उन्हे पहाडी भाषा परिशद् के उपाध्यक्श पद से नवाज़ा. हिरदा और बहुत कुछ करने की सोच रहे थे… कि काल के कुरूर हाथो ने उन्हें हम्से छीन लिया…
आखिरी सलाम हिर्दा.. – जहूर आलम वरिष्ठ रंगकर्मी,अध्यक्ष युगमंच

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