स्वास्थ्य सचिव ने गरुड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायतों को दिए गए फंड की हाईकोर्ट में दी जानकारी, जनहित याचिका में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी

नैनीताल। लाइव उत्तराँचल न्यूज़

Highcourt

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर कोविड 19 महामारी के से लड़ने के लिए जरूरी फंड मुहैया कराए जाने संबंधी जनहित याचिका में मंगलवार को सुनवाई की। प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव की ओर से अदालत में शपथ पत्र के साथ इस मामले में जवाब दाखिल किया गया। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठानी की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की है। बागेश्वर जिले से जुड़ी जनहित याचिका अधिवक्ता डीके जोशी की ओर से दाखिल की गई हैं।इधर स्वास्थ्य सचिव के अदालत में दाखिल सपथपत्र के अनुसार बागेश्वर जिले के विकास खंड गरुड़ को कोरोना महामारी से निबटने के लिए अब तक 14 वें व 15 वें वित्त आयोग मद में कुल 9 करोड़ 15 लाख 62 हज़ार 8 सौ 93 रुपये, मुख्य चिकित्सा अधिकारी बागेश्वर द्वारा प्रत्येक ग्राम सेनेटाइज व पोषण समिति को 5 हज़ार रुपये के हिसाब से 8 लाख 90 हज़ार तथा तहसील के अंतर्गत क्वारेंटाइन केंद्र में खर्च के लिए अग्रिम राशि 25 लाख प्रदान किये गए हैं। भकूनखोला ग्राम पंचायत को साफ सफाई, सैनिटाइज करने के लिए 4000 रुपये, 14 वे वित्त आयोग की 6 लाख 14 हज़ार की राशि जिसमे से 61 हज़ार 4 सौ क्वारेंटाइन सेंटर की साफ सफाई के उपयोग के लिए उलब्ध है, 15 वे वित्त आयोग से प्रथम क़िस्त 1 लाख 39 हज़ार भी ग्राम पंचायत के खाते में भेज दी गयी है, इस प्रकार केवल एक ग्राम सभा भकूनखोला को केंद्रीय वित्त से कुल 7 लाख 44 हज़ार 2 सौ 13 रुपये तथा राज्य वित्त से 1 लाख 79 हज़ार 3 सौ की राशि प्राप्त हो गयी है। इसके अतिरिक्त 5 हज़ार रुपये मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से प्रदान किये गए हैं।
पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने सचिव स्वास्थ्य उत्तराखंड को बागेश्वर जिले सम्बन्धी उपरोक्त तथ्यों व शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाने के निर्देश करने तथा एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया था। याचिकाकर्ता अधिवक्ता डीके जोशी ने सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी न्यायालय में रखा कि विकास खंड गरुड़ में यही ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं हुआ है वहां अभी तक प्रशासकों के पास खर्च किये जाने के अधिकार नहीं दिए जाने के कारण ग्राम पंचायत के खाते को संचालित नहीं किया गया है जिस कारण महामारी से निबटने में सम्बन्धित ग्राम पंचायत बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।

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