महंगा पड़ा आचार संहिता का उल्लंघन करना, युवक का चालान कटा, जानिए आचार सं​हिता लागू होने के दौरान क्या होते हैं नियम

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नैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज


आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करना हरियाणा निवासी युवक को महंगा पड़ा। युवक अपनी गाड़ी में किसान मोर्चा के झंडे लेकर घूम रहा था। तल्लीताल एसओ रोहिताश सागर ने इसकी जानकारी दी। उन्होने बताया कि अंबाला हरियाणा निवासी मंजोत पुत्र नरेंद्र कार संख्या एचआर 26 पिटी 8402 पर किसान मोर्चा के झंडा लगाकर चल रहा था। इस बीच पुलिस चैकिंग में उसके पास से किसान मोर्चा के कई झंडे मिले। झंडों को कब्जे में लेकर युवक के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई है।
दरअसल निर्वाचन आयोग के चुनाव घोषणा के साथ ही आचार संहिता प्रभावी हो जाती है और चुनाव परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है। संविधान में राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों के विनियमन तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए यह व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। संविधान के अनुच्छेद 324 में इसका उल्लेख किया गया है। आचार संहिता के दौरान विशेष रुप से इसका ध्यान रखा जाता है।
सामान्य आचरण: राजनीतिक दलों की आलोचना केवल उनकी नीतियों, कार्यक्रमों, पिछले रिकॉर्ड और कार्य तक सीमित होनी चाहिये। जातिगत और सांप्रदायिक भावनाओं को आहत करने, असत्यापित रिपोर्टों के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना करने, मतदाताओं को रिश्वत देने या डराने और किसी के विचारों का विरोध करते हुए उसके घर के बाहर प्रदर्शन या धरना देने जैसी गतिविधियाँ पूर्णतः निषिद्ध हैं।
सभा: सभी राजनीतिक दलों को अपनी किसी भी बैठक का आयोजन करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को बैठक के स्थान और समय के बारे में सूचित करना चाहिये ताकि बैठक के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
जुलूस: यदि दो या दो से अधिक दल या उम्मीदवार एक ही मार्ग से जुलूस निकालने की योजना बनाते हैं, तो किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिये आयोजकों को पहले ही एक-दूसरे से संपर्क कर लेना चाहिये। इस तरह के जुलूस के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता के पुतले नहीं जलाए जाने चाहिये।
मतदान: मतदान केंद्रों पर सभी दलों के कार्यकर्त्ताओं को उपयुक्त बैज या पहचान पत्र दिया जाना चाहिये। मतदाताओं को चुनावी दल के नेताओं द्वारा दी जाने वाली पर्ची सादे (सफेद) कागज़ पर होगी और इसमें कोई प्रतीक चिह्न, उम्मीदवार का नाम या पार्टी का नाम नहीं होगा।
पोलिंग बूथ: केवल मतदाताओं और चुनाव आयोग द्वारा जारी वैध प्रमाणपत्र वाले लोगों को ही मतदान केंद्रों में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।
प्रेक्षक : निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी, जिसके पास कोई भी उम्मीदवार चुनाव के संचालन के बारे में समस्याओं की रिपोर्ट कर सकता है।
सत्तारुढ़ दल: चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता में वर्ष 1979 में सत्तारुढ़ दल के आचरण को विनियमित करने हेतु कुछ प्रतिबंध लागू किये थे। मंत्रियों द्वारा आधिकारिक यात्राओं का प्रयोग चुनावी कार्यों के लिये नहीं किया जा सकता है, साथ ही चुनावी कार्यों के लिये आधिकारिक मशीनरी का उपयोग भी नहीं किया जाना चाहिये।
चुनावी घोषणापत्र: राजनीतिक दलों को ऐसे वादे करने से बचना चाहिये, जो मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डालते हैं।

(स्त्रोत साभार—दि ​इंडियन एक्सप्रेस)

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