जीवन एक सफर है..हम सब मुसाफिर…कृष्ण कुमार बेरियाल की कविता

कोरोना कर्फ्यू के चलते इन दिनों लोगों की दैनिक दिनचर्या अस्त—व्यस्त चल रही है। लेकिन कोरोना वायरस जिस चरम स्थिति पर अपना कहर दिखा रहा है ऐसे में थोड़ा समय घर में ही रहकर खुद व परिवार को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक हो गया है। साथ ही यह समय दैनिक दिनचर्या के चलते पूरे न कर होने वाले कार्यों को पूरा करने का भी एक अवसर हमें दे रहा है। हमारे सुधी पाठक कृष्ण कुमार ​बेरियाल भी इस समय का सदुपयोग कर अपनी कविता लिखने के शौक को निखार रहे हैं। उन्होंने अपने विचारों को कविता रुप में लिपिबद्ध करने का प्रयास किया है। हम उसे ससम्मान प्रकाशित करने का प्रयास कर रहे हैं। आप सुधी पाठकों की रचनाओं, कविताओं, धार्मिक जानकारी आदि रचनाओं को लाइव उत्तरांचल न्यूज सादर आमंत्रित करता है। आप हमें अपनी रचनाओं को 8979279711 या 9412403532 पर व्हाटसेप के माध्यम से भेजकर हम तक उपलब्ध करा सकते हैं। इन्हें हम मयफोटो प्रकाशित करने का प्रयास करेंगे।

जीवन एक सफर है
हम सब मुसाफिर
जीवन के इस सफर में
अलग—अलग विचारों
अलग—अलग व्यवहारों
के मुसाफिर हैं

कुछ मायुस, कुछ तन्हा
कुछ उदास, कुछ बैचेन
कुछ गमगीन, कुछ हंसमुख
ये सफर कुछ दिनो, कुछ वर्षों का
ना जाने जीवन की गाड़ी का
सफर कब खत्म हो जाए

मै भी इसी सफर का मुसाफिर हूं
एक ही गाड़ी में सवार हैं
पर मुंह से कुछ कह न पाये
कोई मुसाफिर दिल को भाये

एक दिन ये सफर खत्म हो जायेगा
कोई आगे, कोई पीछे गाड़ी
से उतर ही जाएगा
सफर के नियमों का पालन
किया जाय या ना किया जाय
हम छोटे वो बड़े हम गरीब वो अमीर

इन छोटी—बड़ी बातों को याद रखा जाय
याये सोच खामोसी तोड़ी जाय कि
ये सफर कुछ दिनों, कुछ वर्षो का है
ना जाने कौन सा मुसाफिर कहां
उतर जाए
हम सोचते ही रह जाए और
ये जिंदगी का सफर
खत्म हो जाए
और वो गाड़ी छोड़ कर चला जाए

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