मोतीलाल वोरा नैनीताल जिले में गांधी की याद को अमर कर गए, उप्र के राज्यपाल रहते लोगों का दिल जीता था

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नैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज


बुजुर्ग कांग्रेसी नेता मोती लाल वोरा का निधन हो गया है। वोरा का उत्तराखंड से खासा लगाव रहा है। नैनीताल जिले में राष्ट्रपिता का याद को हमेशा के लिए कायम रखने में उनकी अहम भूमिका रही है। जिला मुख्यालय से हल्दानी मार्ग में बसे ताकुला गांव को मोती लाल वोरा ने ही गांधी ग्रााम घोषित किया था। महात्मा गांधी यहां गोविंद लाल साह सलमगड़िया के आतिथ्य में रहे थे और उनके अनुरोध पर राष्ट्रपिता ने यहां गांधी मंदिर की आधार शिला ही नहीं रखी थी बल्कि बाद में इस भवन में प्रवास भी किया था।

मोती लाल वोरा 26 मई 1993 से 3 मई 1996 तक अभिभाजित उप्र के राज्यपाल रहे। गोविंद लाल साह के नाती वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने बताया कि 1995 में मोती लाल वोरा नैनीताल प्रवास पर थे। लखनऊ से पत्रकारों व अन्य साथियों से उनके गांधी प्रेम को लेकर जानकारी मिल चुकी थी। वोरा ने लखनऊ राजभवन में गांधी गैलरी स्थापित कर राष्ट्रपिता के प्रति अपने सम्मान को उजागर किया था। नैनीताल राजभवन में हुई मुलाकत के बाद गांधी जी के ताकुला गांधी जी को लेकर जानकारी दी गई। वोरा ने उस दिन समय की कमी बताई और अगले दौरे में इस बात को रखने को कहा। अगले दौरे में जब उनसे भेंट हुई तो वे ताकुला गांव जाने के तैयार हो गए और उन्होंने न केवल गांव का दौरा किया बल्कि ताकुला को गांधी ग्राम भी घोषित किया। गांधी मंदिर के जीर्णौद्धार के लिए मंडी समिति के पैंसे की भी व्यवस्था की और कार्यदायी संस्था का जिम्मा कुमाऊ मंडल विकास निगम को दिया था। हालांकि आज भी गांधी गांव अपने सही स्वरूप में नहीं आ पाया है लेकिन गांधी ग्राम के साथ मोतीलाल वोरा का नाम हमेशा याद किया जाता रहेगा।

यह भी जानकारी मिली है कि उत्तराखंड आंदोलन के चरम के दौर में राज्यपाल रहे मोतीला वोरा ने गैरसैण को लेकर भी एक कमेटी गठित कराई थी। तत्कालीन आंदोलनकारियों ने इसको पहाड़ के प्रति उनके प्रेम का परिचायक बताया था।


पत्रकार रहे थे मोती लाल वोराः उप्र के राज्यपाल के अलावा मोतीलाल वोरा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय मंत्री भी रहे। सालों तक कांग्रेस के कोषाध्यक्ष का पद भी संभाला लेकिन उऩ्होंने अपने करियर की शुरूआत बतौर पत्रकार की थी। राज्यपाल रहते अपने अल्मोड़ा दौरे में उऩ्होंने पत्रकारों के साथ अपनी यह बात साझा भी की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि हिन्दी के राष्ट्रीय पत्र के पत्रकार रहते उन्हें भोपाल में एक प्लाट भी मिला था। लेकिन पत्रकारों की हालत खस्ता होती है और वे भी इससे दो चार हुए थे और वे भी यह प्लाट बेचने को मजबूर हुए थे।


कांग्रेस के लिए भारी क्षतिः कांग्रेस के लिए वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के बाद वोरा का निधन पार्टी के लिए दूसरा बढ़ा झटका है। 93 साल के वोरा कांग्रेस आला कमान के करीबी थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी समेत बड़ी तादात में लोगों ने उऩके निधन पर शोक व्यक्त किया है। मूल रूप से छत्तीसगढ़ के रहने वाले वोरा का जन्म गत दिवस यानि 20 दिसंबर 1928 को राजस्थान के नागौर जिले में हुआ था। मोतीलाल वोरा की चार बेटियां और दो बेटे हैं। उनका बेटा अरुण वोरा दुर्ग से विधायक है।

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