गांधी जी के कहने पर नेहरू कैबिनेट में मंत्री बने थे मुखर्जी: प्रो.राणा

प्रो . श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेहरू की पहली कैबिनेट में गांधी जी के कहने पर मंत्री बनाये गये थे !किंतु अपने उसूलों के वशीभूत होकर उन्होंने अल्प समय में 8 अप्रेल 1950 को सरकार छोड़ दी ! उनका कहना था – “एक देश में दो विधान एवं दो प्रधान नहीं चल सकते !”इसी मुद्दे पर वो कश्मीर गये शेख़ अब्दुल्ला ने उन्हें गिरफ़्तार करा लिया ! 40 दिन जेल में रखा अनायास युवा अवस्था में उनकी मृत्य का संदेश आया तो आकस्मिक निधन किसी षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहा था ! ये देश का दुर्भाग्य था कि जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष की हत्या हुई ,लोग स्तब्ध थे ! लेकिन हमें संतोष अब हुआ जब मोदी जी ने कश्मीर के उस काले क़ानून को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया ! ये डॉ . मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि है , फिर कोलकाता हवाई अड्डे का नामांतरण भी प्रो मुखर्जी के नाम पर रखना मोदी जी की उनके प्रति श्रद्धा की अनुभूति कराताहै ! प्रो. मुखर्जी युवावस्था में कोलकाता यूनिवर्सिटी के कुलपति बने थे , वो चाहते तो लम्बे अर्से तक एकेडेमिक जीवन शान से गुज़ार सकते थे !किंतु देश प्रेम का जज्वा उन्हें राजनीति में खींच ले गया !जहाँ वो कम उम्र में ही शहीद भी हुए उसूलों की ख़ातिर ,वरना केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बने रहते !आज जो लोग राजनीति में आ रहे हैं उन्हें पता भी नहीं होगा कि प्रो. मुखर्जी 2934-38 तक कुलपति , बंगाल बिधान परिषद के सदस्य एवं वित्तमंत्री भी रहे थे । एक राष्ट्रवादी चिंतक के रूप में लेखक एवं प्रखर वक़्ता के रूप में हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी रहे ! उनके विचार सरदार पटेल से मेल खाते थे , नेहरू जी से मतभेद थे किंतु गांधी के कहने पर वो नेहरू की प्रथम केबिनेट में भी सामिल हुए लेकिन उनके उसूलों के टकराब से लम्बे समय तक वहाँ रह ना सकें , 8 अप्रेल 1950 को  नेहरू मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया फिर प्रतिपक्ष की राजनीति खड़ी करने के लिए 21 अक्टूबर 1951 में जनसंघ की स्थापना करके लोकसभा के चुनाव लड़ाये ,तीन सांसद जीते जो आज 300 के पार खड़े  हैं ! काश .. पटेल प्रधानमंत्री बनते तो ये स्थिति ना आती ना शायद वो जनसंघ का गठन करते किंतु बिध को यही मंज़ूर था ! 1952 में पहली बार के चुनावों में वह स्वयं भी सांसद बने दक्षिण कलकत्ता लोक सभा क्षेत्र से !वो भारत के विभाजन के विरुद्ध थे उसके लिए उन्होंने गांधी जी से बात की तो गांधी ने अपनी पीड़ा बताई कि अब कोंगेस नेहरू की है जहाँ मेरी बात नहीं सुनी जाती ! बंगाल में मुस्लिम लीग की हरकतों से बाज़ आकर बंदरगाह बचाते हुए बंगाल का विभाजन स्वीकार किया !क्यूँकि हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे थे जिससे उन्हें पीड़ा थी !

यह लेख प्रो. केएस राणा – प्रति कुलाधिपति मेवाड़ यूनिवर्सिटी ,राजस्थान ने लिखा है। प्रो. राणा इसके अलावा कई अन्य विवि के साथ ही कुमाऊं विवि के कुलपति भी रहे  हैं। हम पूरे सम्मान व आभार के साथ इसको जारी कर रहे हैं:- संपादक लाइव उत्तरांचल न्यूज

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