संकष्टी चतुर्थी व्रत आज, रविवार को तिथि पड़ने से बन रहा दुर्लभ शुभ संयोग, संकटों को दूर करता है भगवान श्रीगणेश का ध्यान

नैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज

आषाढ़ कृष्ण पक्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत आज है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष संकष्टी चतुर्थी व्रत इस बार दुर्लभ संयोग से रविवार को पड़ रहा है । इसके चलते इस तिथि को रविवती संकष्टी भी कहा जाता है। यूं तो भगवान ​श्रीगणेश का पूजन विघ्नों को समाप्त करने वाला है। लेकिन पुराणों आज के दिन किया गया जप, दान, पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को हमारे सुधी पाठक पंडित प्रकाश जोशी ने हम तक पहुंचाया है। हम इसे आप तक प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैंं।

जिस प्रकार अमावस्या तिथि को सोमवार पड़े तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं ठीक इसी प्रकार संकष्टी चतुर्थी को यदि रविवार पड़े तो उसे रविवती संकष्टी कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा शुभ संयोग बहुत कम आता है। इससे कृष्ण पिंगला संकष्ट चतुर्थी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में सूर्य ग्रह कमजोर स्थिति में हो तो ऐसे लोगों के लिए यह व्रत बेहद लाभकारी होता है। इस व्रत में भगवान सूर्य देव को जल अर्पण कर उन्हें प्रणाम करके विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की आराधना करने से सूर्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
व्रत मुहुर्त: संकष्टि व्रत का शुभ मुहूर्त 27 जून यानि आज रविवार को शाम 3:54 से शुरू होकर और 28 जून 2021 को दोपहर 2:16 मिनट तक रहेगा। आज चंद्रोदय प्रातः 10:03 पर हुआ। चंद्रमा की स्थिति पूर्णरूपेण मकर राशि में होने से श्रवण नक्षत्र एवं वैधृति योग है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा: संकष्टी चतुर्थी मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि एक दिन दिन माता पार्वती एवं भगवान भोलेनाथ नदी के पास बैठे थे। इस दौरान मां पार्वती का मन चौपड़ खेलने का हुआ। लेकिन उस समय वहां पार्वती एवं शिव के अलावा और कोई तीसरा नहीं था ऐसे में कोई तीसरा व्यक्ति चाहिए था जो हार जीत का फैसला कर सके। इस वजह से दोनों ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसमें प्राण शक्ति दी। उसे इस खेल का निर्णायक बनाया गया। चौपड़ खेल में पार्वती मााता विजयी हुई और यह खेल लगातार चलता रहा। कहा जाता है खेल में माता चार बार विजयी हुई और एक बार उस बालक ने भगवान शिव को गलती से विजेता घोषित किया है। जिस पर माता क्रोधित हुई। जिसके चलते वह बालक लंगड़ा हो गया। बालक ने अपनी भूल के लिए मां से क्षमा मांगी। जिस पर करुणामयी माता पार्वती ने उन्हें उपाय सुझाया। कहा कि इस जगह पर संकष्टी के दिन कुछ कन्याएं पूजा करने आती हैं। तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और व्रत करना बालक ने वैसा ही किया बालक की पूजा से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं और बालक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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