सोमवती अमावस्या हिन्दू धर्म का विशेष पर्वः जया जोशी

हिन्दू धर्म में शुक्ल पक्ष की अधिक महत्ता है लेकिन कृष्णपक्ष की भी अहमियत कम नहीं है। इसमें सबसे अधिक कृष्ण पक्ष की समाप्ति की तिथि अमावस्या को विशेष महत्व दिया गया है। इस तिथि को सोमवार होने पर इसकी महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। साल में ऐसे अवसर कम होते है यह योग बनता है।
इस बार चैत्रकृष्ण की अमावस्या आज यानि सोमवार है। इस कुंभ के दौरान आए इस पर्व पर गंगा स्थान का विशेष महत्व रहता है। हरिद्वार सहित गंगा के संगम में आज खासी भीड़ देखी जा सकती है।
अमावस्या विशेष तौर पर पितरों की पूजा का विधान होता है। कहा जाता है कि इस तिथि को किया गया धर्म कर्म पितरों तक पहुंचता है। पितरों का आशीर्वाद से जीवन में आ रहे संकट दूर होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या को सूर्य उदय से पहले गंगाजी में स्नान कर पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्त्व है। गंगाजी में स्नान करने स्थिति नहीं होनेपर घर में रखे गंगाजल को पानी में मिलाकर स्नान करने से भी पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
सोमवारी अमावस्या को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित हैः इसमेें बताया गया है कि एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। बेटों में सभी की शादी हो चुकी थी लेकिन कन्या का विवाह कहीं तय नहीं हो पा रहा था। भिक्षा लेने आए एक ब्राह्ममण से साहूकार की पत्नी ने इस विषय में जानने की कोशिश की। इस पर ब्राह्मण ने बताया कि कन्या की शादी के योग नहीं लग रहा है। हालांकि उऩ्होंने इसके लिए उपाय जरूर बताया। कथा के अनुसार उन्होंने बताया कि सोमा धोबन नाम की धार्मिक व पति परायण स्त्री है। बेटी उसकी सेवा करे तो शादी का योग बन सकता है। बेटी ने यही किया और इसके साथ ही पीपल के पेड़ की भी लगातार पूजा अर्चना की। कुछ समय बाद बेटी को अच्छा घर बर मिल गया। यह भी कहा जाता है कि पांडव सोमवती अमावस्या का सुफल प्राप्त नहीं कर सके। कुल मिलाकर पितरों की पूजा के लिए महत्व रखने वाली सोमवती अमावस्या हर हिन्दू के लिए विशेष महत्व का पर्व है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: