इस बार 14 अप्रैल को है विषुवत संक्रांति विखौती, कुमाऊं में हर संक्राति का है विशेष महत्व

नैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज

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टीम— लाइव उत्तरांचल न्यूज

इस बार विषुवत संक्राति यानि विखौती त्यौहार 14 अप्रैल को है। यूं तो कुमाऊं मंडल में प्रत्येक त्यौहार व संक्राति का अपना विशेष महत्व है। लेकिन सूर्य वर्ष के पहले माह का अपना विशेष महत्व है। हमारे सुधी पाठक पंडित प्रकाश जोशी ने विषुवत संक्राति पर जानकारियों युक्त आलेख हमें भेजा है। हम इसे ससम्मान प्रकाशित करने का प्रयास कर रहे हैं—

सूर्य देव वर्ष भर में बारह राशियों में प्रवेश करते हैं, विषुवत संक्रांति के दिन सूर्य देव बारह राशियों पूरी कर पुनः मेष राशि में प्रवेश करते हैं। सौर वर्ष के अनुसार नव वर्ष इसी दिन से शुरू होता है। कुमाऊँ मण्डल में लगभग हर संक्रांति को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जैसे चैत्र संक्रांति को फूलदेई, बैसाख संक्रांति को बिखौती, कर्क संक्रांति को हरेला, भाद्रपद संक्रांति को घी त्यार, आश्विन संक्रांति को खतड़वा, माघ संक्रांति को घुघूती त्यौहार आदि को मनाया जाता है। बैसाख संक्राति का अपना विशेष महत्व है। कुमाऊँ में यह बडे़ हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस बार 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है। कुमाऊं में कहीं इसे बिखौती तो कहीं बिषु त्यार भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन प्रत्येक व्यक्ति को स्नान करना अनिवार्य होता है। चाहे वह बच्चे हों, वृद्ध हो या रोगी ही क्यों न हो। किवदंती है कि शरीर के जिस भाग में जल न छुवे वहाँ पर विष पैदा हो जाता है। इस दिन पीने हेतु भी ताजा जल प्रयोग किया जाता है। कुमाऊं के कुछ हिस्सों में कहीं इस दिन लोहे की गरम सलाका शरीर में लगाने का भी रिवाज है। इस दिन द्वाराहाट में लगने वाला मेला मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है। द्वाराहाट से आठ किलोमीटर दूर विभांडेश्वर में बिखौती का मेला लगता है। डा़. हरि नारायण दीक्षित ने तो अपने प्रसिद्ध काव्य ग्रंथ में विभांडेश्वर महादेव की कुमाऊँ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के रूप में वर्णित किया है।
उन्होंने लिखा है—

नागार्जुन गिरे:कुक्षो वामेन रथ वाहिनीम , सुरभि नन्दिनी नद्धोर्मध्ये परम पालने, विभांडेश्वर महादेव श्रयन सर्वाघहारिणम
अर्थात नागार्जुन नामक पर्वत के बगल में रथवाहिनी नामक गंगा नदी के बांई ओर बहने वाली सुरभि और नन्दिनी नामक दो नदियों के बीच स्थित विभांडेश्वर महादेव नामक तीर्थ स्थल के दर्शन मात्र से समस्त पापों
का नाश होता है।

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