प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति शासन के लिए याद रखेगा उत्तराखंड, अलविदा भारत रत्न प्रणबदा – जगदीश जोशी वरिष्ठ पत्रकार ,नैनीताल

नैैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज

फोटोः  पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविड ने  भारत रत्न प्रदान किया( फाइल फोटो)

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 वर्ष की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे और दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थे। प्रणब मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन की जानकारी ट्वीट करके दी। प्रणब मुखर्जी को पहली बार लगे राष्ट्रपति शासन ( फिलहाल अभी तक) के लिए उत्तराखंड हमेशा याद रखेगा। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल मेें 27 मार्च 2016 को प्रदेश में प्रणब मुखर्जी के हस्ताक्षर से ही राष्ट्रपति शासन लगा था । यह महज संयोग था कि उत्तराखंड में उस दौर में कांग्रेस की सरकार थी जिस पार्टी में उन्होंने अपने जीवन के चालीस दशकों से अधिक का समय व्यतीत किया था। यही नहीं कांग्रेस पार्टी में लंबे समय तक उनके निकट के साथी रहे हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे। हालांकि उत्तराखंड हाईकोर्ट में उनके आदेश खारिज कर दिया और हरीश रावत सरकार फिर से कायम हुई।

नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद लगभग एक माह तक अपदस्थ रही हरीश रावत की सरकार अप्रैल 2016 में पुनः सत्ता में वापसी आ गई थी। नैनीताल हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की थी जिसका आशय था कि प्रजातंत्र में राष्ट्रपति सर्वोच्च सम्मानित पद होने के बावजूद भी देश में लागू कानून से बड़ा नहीं है। वहीं तत्कालीन सीएम हरीश रावत की टिप्पणी रही थी कि  उत्तराखंड के शरीर पर लगे घावों को उच्च न्यायालय के आदेश से मरहम लग गया है। इधर इस घटना क्रम के पांच महिने के अंदर ही प्रणब मुखर्जी देहरादून पहुंचे थे। 27 सितंबर 2016 को तीन दिन के प्रवास पर  प्रेसीडेंट हाउस देहरादून में ठहरे थे। राज्यपाल डा. केके पॉल के साथ ही सीएम हरीश रावत ने उनकी आगवानी की थी।  
राष्ट्रपति ने इस दौरे में देहरादून के राजपुर रोड पर बनने जा रहे  आशियाना एनेक्सी की आधारशिला रखी थी। इसके बाद प्रणबदा फिर जब देहरादून आए थे तब प्रदेश में भाजपा सरकार बन चुकी थी।  एक जुलाई 2017 को उन्होंने यहां पहुंच कर  नए बने आशियाना एनेक्सी का उद्घाटन किया था।  बतौर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में 10 जुलाई 2017 को फिर देहरादून पहुंच उन्होंने इस बार आशियाना भवन में राज्य की कई जानी-मानी हस्तियों को लंच भी दिया।  प्रणव मुखर्जी ने देश के  13 वें राष्ट्रपति के तौर पर 25 जुलाई 2012 को पदभार संभाला था। वो 25 जुलाई 2017 को सेवानिवृत्त हुए।

रानीखेत भी आते रहेः प्रणब मुखर्जी उत्तराखंड के दौरे में पहले भी आते रहे हैं। रानीखेत में पत्रकारिता के दौर में वर्ष 2000 में उनसे हुई मुलाकात मुझे आज भी याद है।  कांग्रेस के बड़े नेता कश्मीर से पूर्व राजा कर्ण सिंह के दामाद के मजखाली स्थित रिजॉर्ट में उऩसे कुछ देर मुलाकात हुई थी। अटल विहारी वाजपेयी की तत्कालीन सरकार के निजीकरण के चल रहे कदम पर उनकी प्रतिक्रिया ली थी। इसमें उन्होने कहा था कि देश की आर्थिक पृष्ठभूमि को सामने रख कर ही निजीकरण के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

देश का सर्वोच्च सम्मान फिर भी मलालः प्रणब मुखर्जी 1969 में राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में कदम रख लिया था। इसके बाद से प्रणबदा हमेशा देश की राजनीति में सक्रिय रहे। राजनीति में कुछ समय को छोड़ दिया जाय को प्रणबदा कांग्रेस हाईकमान के गुडबुक में बने रहे। राजीव गांधी की हत्या के बाद तथा बाद में सोनिया गांधी के पीएम पद नहीं लेने पर डा.मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाए जाने के मौके पर वो पीएम के पद तक पहुंचने में कामयाब नहीं रहे। हालांकि पार्टी ने उन्हें 2012 में राष्ट्रपति बना दिया लेकिन पीएम नहीं बनने की टीस उनके दिल में बनी रही।  उन्होंने इसको कभी खुलकर उजागर नहीं किया।  उन्होंने  ‘द कोलिएशन ईयर्स: 1996-2012’ नाम से लिखी अपनी किताब में  अपने राजनैतिक जीवन के कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने उनके राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद इस किताब का विमोचन किया। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री न बनाए जाने पर प्रणब मुखर्जी के पास ‘अपसेट’ होने का जायज़ कारण था, क्योंकि प्रणब इस पद के लिए अधिक योग्य थे। वहीं प्रणब मुखर्जी से इसको लेकर जब भी सवाल किए गए तो उनका यही जवाब रहता कि  पार्टी हाईकमान का फैसला सही था। हालांकि लोगों का यह मानना है कि प्रणबदा को पीएम नहीं बनने की टीस रही थी। इधर कांग्रेस की धुर विरोधी भाजपा के सत्ता में आने के बाद अगस्त 2019 में मोदी सरकार ने  उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित भी किया गया। पुरानी पीढ़ी के इस बहुआयामी नेता के चले जाने से सही मायने में भारत ने एक रत्न खो दिया है। लाइव उत्तरांचल न्यूज टीम भी ऐसे महान नेता को श्रद्धा सुमन अर्पित करता है।

व्हाट्सएप पर लाइव उत्तरांचल न्यूज के नियमित समाचार प्राप्त करने व हमसे संपर्क करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/BhBYO0h8KgnKbhMhr80F5i

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: