अच्छे साहित्य के बिना बेहतर रंगमंच की कल्पना भी नहीं की जा सकतीःडॉ. सुवर्ण रावत, महादेवी वर्मा सृजन पीठ के संयोजन में ‘मेरी रंग यात्रा के साहित्यिक पड़ाव’ विषय पर परिचर्चा संपन्न

डॉ. सुवर्ण रावत


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नैनीताल। लाइव उत्तरांचल न्यूज

वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. सुवर्ण रावत ने कहा है कि साहित्य और रंगमंच का सम्बन्ध बहुत गहरा। उन्होंने कहा कि अच्छे साहित्य के बिना बेहतर रंगमंच की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह सर्वविदित है कि नाटक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। यह समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बन सकता है। डॉ. रावत मंगलवार को कुमाऊं विवि के रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा ‘मेरी रंग यात्रा के साहित्यिक पड़ाव’ विषय पर फेसबुक लाइव के जरिए आयोजित ऑनलाइन चर्चा में विचार व्यक्त कर रहे थे।

डॉ. रावत ने कहा कि आदमी नाटक सिर्फ तभी नहीं करता है, जब वह मंच पर होता है या फिर वह कोई फिल्म या टेलीविजन शो कर रहा होता है। दरअसल आदमी सुबह जल्दी उठने से लेकर देर रात सोने तक एक्टिंग ही करते हैं। यह मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति है। 

एनएसडी से परास्नातक डॉ. सुवर्ण रावत ने अपनी रंग यात्रा के दौरान साहित्यिक कृतियों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शुरूआती दिनों की याद करते हुए रंगकर्मी सुरेश गुरूरानी की नाट्य संस्था ‘नैनी लोक कलाकार संघ’ के अंतर्गत नैनीताल शरदोत्सव में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कृति ‘लाॅन की घास’ पर आधारित डॉ. मधुसूदन मत्तर के निर्देशन में प्रस्तुति, उत्तरकाशी माघ मेले में भीष्म साहनी की कृति ‘कबीरा खड़ा बाजार’, ‘पोस्टर’ और मन्नू भंडारी की कृति ‘महाभोज’ पर आधारित प्रस्तुति, ‘युगमंच’ के अंतर्गत ‘हैमलेट’, ‘नाटक जारी है’ सहित रस्किन बांड की कहानी ‘ब्लू अंब्रेला’ का राष्ट्रीय स्तर के नाट्य महोत्सव ‘जश्न-ए-बचपन’, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के लोक संस्कृति एवं कला प्रदर्शन केंद्र, श्रीनगर में  ‘नीली छतरी’ तथा डेनमार्क के लेखक हैन्स क्रिश्चियन एंडरसन की डैनिश कहानी का ‘घुघूती’ नाम से तथा उन्हीं की कहानी का गाँधीनगर (गुजरात) में ‘हुआ लफ़ड़ा पहन के कपड़ा’ शीर्षक से मंचन के बारे मे जानकारी दी। इसके अतिरिक्त उन्होंने राजेश्वर उनियाल के उपन्यास ‘पन्देरा’ की राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, महाबीर रंवाल्टा की कहानी ‘खुली आँखों में सपने’ का ‘ढोल के पोल’ नाम से देहरादून, गुड़गांव व एनएसडी तथा डाॅ. हरिसुमन बिष्ट के हिंदी मे ‘आछरी-माछरी’ नाम से प्रकाशित उपन्यास ‘द सागा ऑफ माउंटेन गर्ल’ के ‘रंगीन परछाई’ शीर्षक से मंचन का उल्लेख किया।  

   उन्होंने उत्तराखंड में रंगमंच की स्थिति के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब भी दिया। बताया कि कोरोनाकाल से पहले फरवरी, 2020 में संस्कृति विभाग और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंड रंगमंच के इतिहास में पहली बार ‘भारत रंग महोत्सव’ का आयोजन देहरादून में किया गया, जिसमें नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि देशों के नाटक भी प्रदर्शित किए गए। शुरूआत हो गई है और आगे इसका फाॅलोअप भी होगा।

नैनीताल, देहरादून व उत्तरकाशी जिले में रंगमंच पर अच्छा काम हो रहा है। शेष जनपदों में भी समय-समय पर नाट्य प्रस्तुतियाँ होती हैं जो कि रंगमंच के संरक्षण की दृष्टि से अच्छा संकेत है। उन्होंने एनएसडी ‘थिएटर-इन-एजूकेशन’ टीआईई कंपनी सहित बच्चों के एक्टिंग सीखने के लिए ऑनलाइन क्लास की पहल, कोविड के समय नाटक की स्थिति तथा भविष्य की संभावना आदि पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए।   

 
कोरोना से जुड़ी नमस्ते कविता का पाठः- डाॅ. रावत ने अपने संबोधन के अंत में कोरोनाकाल में सावधानी बरतने की हिदायत देती अपनी कविता ‘नमस्ते’ का पाठ किया। ‘कभी रोजमर्रा की जिंदगी सरपट भागती, सड़क पर फर्राटेदार गाड़ियाँ हाॅर्न बजाती, अब कोरोना महामारी से बदल गया सारा जहाँ, टिमटिमाते तारे सिमटे हुए ये नीला आसमां, खूब झूमने लगे हैं पेड़ अब सरसराने लगी हैं पत्तियाँ, मंडराने लगे हैं जानवर चहकने लगी हैं पंछियां, जहरीली हवाओं से भरा धुँआ थम-सा गया, कुदरत की गोद में सुकून से दिल रम गया, पुरानी भूली-बिसरी आदतों को फिर से जाना, घर-परिवार के साथ अपने मिल-बैठकर खाना, रहेंगी याद मिलकर ढेर सारी बातें-मुलाकातें, अपनी जिम्मेदारी से भरे लम्हों की मुलाकातें, फिलहाल न हाथ मिलाना और न ही गले लगना, सिर्फ दूर से ही मुस्कुराते हुए बस ‘नमस्ते’ कहना।’ इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘अपने मम्मी-पापा’ शीर्षक से बाल कविता का पाठ भी किया।     
डाॅ. सुवर्ण रावत का परिचयः- डाॅ. सुवर्ण रावत उत्तरकाशी में जन्मे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली के प्रशिक्षित रंगकर्मी हैं। देश के विभिन्न विद्यालयों और विवि में रंगमंच के शिक्षण से जुड़े रहे हैं। उन्होंने नाटकों के लेखन, परिकल्पना, अभिनय के साथ निर्देशन भी किया है। आपके द्वारा तैयार नाटकों का मंचन सभी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय नाट्य महोत्सवों में किया जा चुका है। आपने टेलीविजन और फिल्मों के लिए भी काम किया है। आपने भारतीय फिल्म प्रशिक्षण संस्थान (एफटीआईआई) पुणे से फिल्म सम्बन्धी प्रशिक्षण तथा ‘रंगमंच का शिक्षा में महत्व’ विषय पर पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से  पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने लंदन (इंग्लैंड) तथा वरसाव (पोलैंड) में आयोजित इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

कार्यक्रम में शामिलः- कार्यक्रम में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक प्रो. शिरीष कुमार मौर्य, शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत सहित वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट, नवीन कुमार नैथानी, वरिष्ठ रंगकर्मी आलम, डॉ. प्रभात उप्रेती, कुसुम भट्ट, खेमकरण सोमन, प्रबोध उनियाल, डाॅ. कमलेश कुमार मिश्रा,  नीरज रावत, उदय देशप्रभु, गीता तिवारी, नीरज पंत, जयश्री रावत, डाॅ. गिरीश पाण्डेय ‘प्रतीक’, सुरक्षा रावत, गोविंद नागिला, डाॅ. ललित जोशी, नीलम भंडारी, अनिल कुमार, मनीषा पाण्डेय, गोविंद यादव, शालिनी मिश्रा, रविन्द्र देवलियाल, राजविंदर कौर, शांति चंद, कौशल्या चुन्याल, देवेन्द्र भट्ट, रंजना झा, रोहित बिष्ट, अलका तिवारी, सुजय रावत, मीनाक्षी बिष्ट, विजेंद्र रावत, शालिनी साहू आदि साहित्य-प्रेमी सम्मिलित हुए।

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